सरल जीवन का दिव्य सूत्र
“सरल” – जीवन का सच्चा मंत्र
स – सीता जी
र – राम जी
ल – लक्ष्मण जी
“सरल” केवल एक शब्द नहीं, बल्कि जीवन जीने की एक पूर्ण साधना है।
जिसने अपने जीवन में सीता जी सा धैर्य, राम जी का मर्यादा और लक्ष्मण जी की निष्ठा को उतार लिया, उसका जीवन स्वयं ही सरल हो जाता है।
सीता जी – धैर्य और पवित्रता
सीता जी ने विपरीत परिस्थितियों में भी संयम नहीं छोड़ा। अपार कष्टों के बीच भी उनका विश्वास अडिग रहा।
जीवन हमें भी अनेक परीक्षाओं से गुज़ारता है, पर यदि हम धैर्य बनाए रखें, तो हर कठिनाई छोटी लगने लगती है।
राम जी – मर्यादा और कर्तव्य
राम जी ने सदा धर्म और मर्यादा को सर्वोपरि रखा। सुख हो या दुःख, उन्होंने कर्तव्य का मार्ग नहीं छोड़ा।
आज के समय में यदि मनुष्य मर्यादा और सत्य को अपनाए, तो जीवन की आधी समस्याएँ स्वतः समाप्त हो जाएँ।
लक्ष्मण जी – सेवा और समर्पण
लक्ष्मण जी का जीवन सेवा और त्याग का उदाहरण है। उन्होंने बिना प्रश्न किए अपने धर्म का पालन किया।
यदि हम अपने संबंधों में समर्पण और निष्ठा रखें, तो घर-परिवार में प्रेम और शांति बनी रहती है।
अर्थात निष्कर्ष यह निकलता है कि जो व्यक्ति “सरल” बन जाता है, वह जीवन की कठिन सें कठिन उलझनों में भी उलझता नहीं।
वह परिस्थितियों से लड़ता नहीं, उन्हें समझकर स्वीकारता है।
वह शिकायत नहीं करता, बल्कि समाधान खोजता है।
और सरल जीवन ही में ही सफल जीवन जीता है।
हमें बाहर की जटिलताओं को नहीं, अपने भीतर की सरलता को बढ़ाने की आवश्यकता है।
जब मन में सीता का धैर्य, राम की मर्यादा और लक्ष्मण की निष्ठा बस जाती है,तब जीवन की हर कठिन राह भी सहज सरल पथ बन जाती है।
— सोमेश देवांगन
