तरक़्क़ी का पोस्टमार्टम
शहर बोला मैं तरक़्क़ी की मिसाल बन गया,पेड़ बोला अरे मैं फ़ाइल में सवाल बन गया। नदियाँ बोलीं अब हमें
Read Moreशहर बोला मैं तरक़्क़ी की मिसाल बन गया,पेड़ बोला अरे मैं फ़ाइल में सवाल बन गया। नदियाँ बोलीं अब हमें
Read Moreघर में आर्थिक तंगी, बाहर महँगाई का शोर,रोटी पहले सोचे घर, फिर सपनों की ओर।महँगी हो रही शिक्षा, अब सस्ती
Read Moreगाँव के आख़िरी छोर पर मिट्टी की दीवारों वाला एक घर था,उसी में रहता था हरिहर तीन बीघा बंजर-सी ज़मीन,
Read Moreबूंद-बूंद बरस के ज़हर रस क्यों घोल हे,आई विपदा तो रोकर किसान बोल रह। ओ ज़ालिम बादल, तरसे तो बरसे
Read Moreहर साल वही नाटक दोहराया जाता है।लाखों रुपये खर्च करके विशाल रावण खड़ा किया जाता है,फिर पटाखों से उसे जला
Read Moreदिखावे का क्यू ,मना रहे महिला दिवस ।सब ने महिलाओं को, बना लिया सहस ।।महफूज नही बहु बेटी, फिर कैसा
Read Moreमैं तिरँगा तीन रंग का चौथे रंग में रंग जाता हूँलेकर लहू लाल रंग लाल की बलि चढ़ाता हूँकोख कलाई
Read Moreमैं तिरँगा तीन रंग का चौथे रंग में रंग जाता हूँलेकर लहू लाल रंग लाल की बलि चढ़ाता हूँकोख कलाई
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