पद्य साहित्य

हाइकु/सेदोका

इरादों में कमी कैसे आई

धूप मुस्काई,मन ने पूछा चुप—इरादे कहाँ? सूना पथ था,पत्ते बोले धीरे—कदम ठिठके। ओस की बूँद,साहस फिर चमका—भोर जागी। ऊँचा पर्वत,नज़र

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हाइकु/सेदोका

प्रकृति की गोद में

ओस की बूँदपत्ती मुस्काईभोर जागी नभ नीला हैपंछी गुनगुनाएँमन महके नदी बहेलहरें गाएँसपने तैरें शीतल पवनवन मुस्काएफूल झरें बादल आएधरती

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