ग़ज़ल
इकरार तो हुआ मगर इसरार भी तो होउनको हमारे प्यार की दरकार भी तो हो बेचैन बना देती है खामोशियां
Read Moreऐसी रार मचाते आयेतहज़ीबें ठुकराते आये कहने भर के सारे रिश्तेएकतरफ़ा ही निभाते आये सबने छोड़ दिया जब हमकोख़ुद को
Read Moreवो भी क्या दिन थे, हाँ भले ख्वाब अनगिनत थे !न मुश्किलों का डर,न बात बेबात का इतना असर! दिलों
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