इरादों में कमी कैसे आई
धूप मुस्काई,मन ने पूछा चुप—इरादे कहाँ? सूना पथ था,पत्ते बोले धीरे—कदम ठिठके। ओस की बूँद,साहस फिर चमका—भोर जागी। ऊँचा पर्वत,नज़र
Read Moreधूप मुस्काई,मन ने पूछा चुप—इरादे कहाँ? सूना पथ था,पत्ते बोले धीरे—कदम ठिठके। ओस की बूँद,साहस फिर चमका—भोर जागी। ऊँचा पर्वत,नज़र
Read Moreघर-आँगन की छाँव में, पलते प्रेम-विचार।लोभ लगा जब मन कहीं, टूटे सब परिवार॥ माटी केवल खेत की, नहीं हृदय का
Read Moreहे नवांकुरो!घबड़ाना मतलिखते रहनाकलम को मजबूत रखनामत डरना आलोचनाओं से सच लिखना तुमएक दिन तुम भीआग की भट्टी सेपककर निकलोगे
Read Moreकिसी को दुःख देना, एक ऐसा क़र्ज़ है,जिसका हिसाब रखता स्वयं सृष्टि का फ़र्ज़ है।समय की अदालत में हर कर्म
Read Moreमिडिल क्लास तो मिडिल क्लास हैभरा हुआ आधा गिलास है अच्छे दिन आने वाले हैं सदालगाए वह तो यह ही
Read More1 जुलाई – डॉक्टर्स डे पर विशेष कविता सफेद कोट में “सेवा” का दीप,हरेक पीड़ा में रहते हैं समीप।दिन हो,
Read Moreसूरज होते भीचारों ओर है घोर अंधेरा,रात के वक्त रोशनी में भी अंधेरा !खंडहर से दिलऔर रेगिस्तान से चित्त में
Read Moreओस की बूँदपत्ती मुस्काईभोर जागी नभ नीला हैपंछी गुनगुनाएँमन महके नदी बहेलहरें गाएँसपने तैरें शीतल पवनवन मुस्काएफूल झरें बादल आएधरती
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