गज़ल
आपने उसे शहर में ढूंढा ही नहींफिर कहते हो कि वो मिला ही नहीं ख़ूब खाकर भी लेते नहीं है
Read Moreकीर्ति जिसकी फैलती रमेश चारों ओरउनके खिलाफ ना मचे कोई सा भी शोर करता जो भी आदमी परिश्रम ही भरपूरउसके
Read Moreरोटी के ही वास्ते होरी छोड़ें गांवतब भी अभाव में धंसे उसके अपने पांव कैसा रमेश शहर है पूछे ना
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