कुर्सी गाथा
कुर्सी से सदैव करें, जो भी प्यार दुलारवही नेता स्वयं का, रमेश करें उद्धार कुर्सी छिनने वास्ते, रहता है तैयारहरदम
Read Moreकुर्सी से सदैव करें, जो भी प्यार दुलारवही नेता स्वयं का, रमेश करें उद्धार कुर्सी छिनने वास्ते, रहता है तैयारहरदम
Read Moreकीर्ति जिसकी फैलती रमेश चारों ओरउनके खिलाफ ना मचे कोई सा भी शोर करता जो भी आदमी परिश्रम ही भरपूरउसके
Read Moreरोटी के ही वास्ते होरी छोड़ें गांवतब भी अभाव में धंसे उसके अपने पांव कैसा रमेश शहर है पूछे ना
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