गीतिका/ग़ज़ल रमेश मनोहरा 25/11/202525/11/2025 गज़ल घबराते हैं जो अपनी ही हार सेलड़ते हैं वे ज़ंग लगी तलवार से हथियार की भाषा जो समझता यहांवो समझे Read More
गीतिका/ग़ज़ल रमेश मनोहरा 19/10/202519/10/2025 गज़ल कान जिनके बहरे हैं शोर सुनाई नहीं देतेआम आदमी कभी उनको दिखाई नहीं देते हरदम जो अपने ही लाभ का Read More
गीतिका/ग़ज़ल रमेश मनोहरा 18/09/202518/09/2025 गज़ल ज़माने का अजीब दस्तूर हो गयाआदमी रिश्तों से ही दूर हो गया मिलती नहीं उन्हें दो वक्त की रोटीजबकि सभी Read More
गीतिका/ग़ज़ल रमेश मनोहरा 16/08/202516/08/2025 गज़ल नेता है सभी नवाब यहांकाली ओढ़ते नकाब यहां आजादी से अब तक ही तोलगे नारे बेहिसाब यहां पूजा जाता वहीं Read More
गीतिका/ग़ज़ल रमेश मनोहरा 08/07/202508/07/2025 गज़ल सच कभी होता नहीं उनके बयान मेंयह बात आती नहीं यार के ध्यान में वादे भूख मिटाने के खूब किये Read More
गीतिका/ग़ज़ल रमेश मनोहरा 02/06/202502/06/2025 गज़ल झूठ बोलते उसे ज़माना गुजर गयायही बात पूछी उससे तो मुकर गया अब कोई नहीं पूछे हैं उसको यहांजब से Read More
गीतिका/ग़ज़ल रमेश मनोहरा 06/04/202506/04/2025 गज़ल जिसके भीतर सदा ही चोर होते हैंइस जहां में वे आदमखोर होते हैं बहरे है वे तो जन्म से सुनो Read More
गीतिका/ग़ज़ल रमेश मनोहरा 10/02/202510/02/2025 गज़ल होरी उमर भर कर्ज़ से कमर तोड़ लेता हैंबनिया एक शून्य ‘औ’ बढ़ाकर जोड़ लेता हैं गिरवी रखें हैं खेत Read More
गीतिका/ग़ज़ल रमेश मनोहरा 15/01/202515/01/2025 गज़ल आपसी रंजिश को अब तो आप मिटा लो यारोमिलकर एक दूजे को गले लगालो यारों सख्त चट्टान है खोदना भी Read More
गीतिका/ग़ज़ल रमेश मनोहरा 14/12/202414/12/2024 गज़ल बंद खिड़कियां जेहन की खोलिये साहबखुली आँखों से उन्हें तोलिये साहब पहुंचे नहीं चोट उनको किसी तरह सेइसलिए शब्द सोचकर Read More