ग़ज़ल
इस तरह से ज़िन्दग़ी में संतुलन कायम रखो
कोशिशें ज़्यादा हमेशा और हसरत कम रखो
पीठ पीछे मुस्कुराएगा ज़माना देख कर
मश्विरा है दर्द हो तो भी न आँखें नम रखो
जब कहो कुछ बात तो तुमको सुनें बाग़ौर सब
हर अदा हर शब्द में हर बात में वो दम रखो
मुश्किलों से जीतने का मंत्र है केवल यही
काविशें पुरज़ोर अपने हौसले बम बम रखो
दो दिलों में एक धड़कन की तमन्ना है अगर
छोड़ मैं तू का भरम बस ज़िन्दग़ी में हम रखो
एक ये ही है तरीका तीरग़ी के दौर में
सत्य का दीपक जलाओ दूर मन से तम रखो
हर तरफ़ विद्वेष कुंठा नफ़रतों के दौर में
कम से कम दिल में तो बंसल प्यार का मौसम रखो
— सतीश बंसल
