गीतिका/ग़ज़ल *भरत मल्होत्रा 19/04/202619/04/2026 ग़ज़ल फ़िरके मज़हब के खानों में बंटता चला गयामुकम्मल आदमी था मैं घटता चला गया पहले तो बढ़ा, और बढ़ा, और Read More
गीतिका/ग़ज़ल *भरत मल्होत्रा 27/03/202627/03/2026 ग़ज़ल अपनों से ही खाकर धोखा तड़पी है ये जान बहुतमैंने अपने भोलेपन में भुगते हैं नुकसान बहुत यूँ ही नहीं Read More
गीतिका/ग़ज़ल *भरत मल्होत्रा 25/02/202625/02/2026 ग़ज़ल रस्म-ए-उल्फत को इस तरह निभाया मैंनेसुना जो नाम तेरा सर को झुकाया मैंने लहू-लहू था बदन चाक गिरेबां था मगरअपनी Read More
गीतिका/ग़ज़ल *भरत मल्होत्रा 28/01/202628/01/2026 ग़ज़ल दुआ ये दो मुझे मेरा सुखन पुकार उठेआफरीन सारी अंजुमन पुकार उठे साथ-साथ चले साया-ए-बहार मेरेजहां से निकलूँ मैं चमन-चमन Read More
गीतिका/ग़ज़ल *भरत मल्होत्रा 25/12/202525/12/2025 ग़ज़ल कौन साथ वक्त के बदल नहीं गयासूरज भी शाम होते ही क्या ढल नहीं गया जाना जो उसे होता तो Read More
गीतिका/ग़ज़ल *भरत मल्होत्रा 17/11/202517/11/2025 ग़ज़ल किसी से दिल को लगाने की ज़रूरत क्या थीकि हस्ती अपनी मिटाने की ज़रूरत क्या थी दिल की दुनिया में Read More
गीतिका/ग़ज़ल *भरत मल्होत्रा 10/11/202510/11/2025 ग़ज़ल कज़ा की जानिब से पुकारे तो सभी जाएंगेजो पैदा हुए हैं मारे तो सभी जाएंगे रख के कब्र में तुझको Read More
गीतिका/ग़ज़ल *भरत मल्होत्रा 20/09/202520/09/2025 ग़ज़ल इक उम्र तक ये काफी पशेमान हुआ हैअब जा के मेरे दिल को इत्मीनान हुआ है अच्छा हुआ तू छोड़ Read More
गीतिका/ग़ज़ल *भरत मल्होत्रा 17/09/202517/09/2025 ग़ज़ल इस दुनिया में मेरे यार वक्त जिसका बदलता हैउसकी गुफ्तगू का खुद ब खुद लहज़ा बदलता है जो कहता था Read More
गीतिका/ग़ज़ल *भरत मल्होत्रा 15/09/202515/09/2025 ग़ज़ल अपनों की चालबाज़ी से हारा हुआ इक शख्समैं हूं मियां हालात का मारा हुआ इक शख्स निकला है कार ले Read More