हमारे बच्चों के लिए क्या चाहिए
अभिभावक (शिक्षक एवं माता पिता, बड़े भाई बहन आदि परिजन) के रूप में ध्यान दें कि आठवीं की कल अंतिम परीक्षा संपन्न हुई है और दसवीं- बारहवीं के बच्चे भी भी दो चार दिन में फ्री हो जाएंगे।
हमारे इन बच्चों के पास और इनके लिए अपने पास तीन महिने हैं, इनकी रुचि- प्रकृति – क्षमता और सामाजिक आवश्यकता के अनुरूप विभिन्न कार्यों के एक्सपोजर- अभ्यास – सुपोषण और विकास के लिए।
अपने पास सहजता से उपलब्ध सुविधाएं हो सकती हैं-
१ विभिन्न सामान्य ज्ञान एवं विषय ज्ञान प्रतियोगिताएं
२ सुलेख संबंधित अभ्यास
३ विद्यालय और घर के बगीचे और किचन गार्डन में कार्य करने के अवसर
४ घर- विद्यालय लकड़ी के खराब फर्नीचर (नॉन रिपेयरेबल ) से कुछ निर्माण (कबाड़ से जुगाड़)
५ मिट्टी आदि से कुछ निर्माण की कला का विकास
६ पेपरमेशी के लिए पुराने अखबार आदि से कुछ बनवाना
७ पढ़ने के लिए पुरानी पुस्तकें आदि एकत्र कर पढ़ना पढ़ाना और संभव हो तो इसकी नेकी की दीवार बनवाना
८ वाल पेंटिंग और दीवार लेख (घर और स्कूल की दीवारें सजाना)
९ खेल – चैस आदि इनडोर एवं रस्सी कूद आदि सहजता से संभव खेलों का अभ्यास
१० विभिन्न विषयों के वीडियो पाठ के माध्यम से उनका प्राथमिक परिचय
११ कक्षओं और बरामदों की थीम के अनुसार उपयुक्त सामग्री तैयार कर घर- विद्यालय आदि की सजावट करना।
…. हम सभी देखें कि हमारे बच्चों के लिए क्या चाहिए, क्या उपयुक्त है? और तदवत अवसर दे। इन गतिविधियों से बच्चों का भाग्य संवरेगा, उससे भारत का और
देश का ही भाग्य अपना भाग्य है…..
बच्चों का हो या अपना खाली दिमाग शैतान का घर न बने। साथ ही , जहां से आनन्द बिखरे वहां से इससे झोली भरें और स्वयं भी आनन्द बिखेरें।
— मुरलीधर पालीवाल