गीतिका/ग़ज़ल

गीतिका/ग़ज़ल

प्रति दिन दान किया जाता है
मान गुमान किया जाता है

जिंदगी चलती नेक राहों पर
चल अभिमान किया जाता है

तिल-तिल बढ़ती है बारिकियाँ
जिस पर शान किया जाता है

पपिहा पी पी कर पछताए
कलरव गान किया जाता है

परिंदे दूर तलक उड़ जाते
हद पहचान किया जाता है

पग पग पर चढ़ आ जाए तो
बैठ थकान किया जाता है

गफलत हो जाती है गौतम
खुद का मान किया जाता है

— महातम मिश्र, गौतम गोरखपुरी

*महातम मिश्र

शीर्षक- महातम मिश्रा के मन की आवाज जन्म तारीख- नौ दिसंबर उन्नीस सौ अट्ठावन जन्म भूमी- ग्राम- भरसी, गोरखपुर, उ.प्र. हाल- अहमदाबाद में भारत सरकार में सेवारत हूँ