कविता

कुछ लिख लेती हूं

जब दर्द सीने में इकट्ठा हो जाता है
तो उसे बहाने के लिए कुछ लिख लेती हूं
जब प्यार हद से अधिक छलक जाता है
तो उससे बात बढ़ाने के लिए कुछ लिख लेती हूं
जब प्रीत सागर के जैसी हो जाती है
तो उसे छुपाने के लिए कुछ लिख लेती हूं
जब मनमीत कोई धोखा दे जाता है
तो विश्वास दिलाने के लिए कुछ लिख लेती हूं
जब चिड़िया आकाश में उड़ते उड़ते बहुत दूर चली जाती है
तो उसे बुलाने के लिए कुछ लिख लेती हूं
जब कलियां बागों में गुलदस्ते जैसी दिखने लगते हैं
तो खुशबू के लिए कुछ लिख लेती हूं

— डॉ. सरिता चौहान

डॉ. सरिता चौहान

पीएम श्री एडी राजकीय कन्या इंटर कॉलेज गोरखपुर उत्तर प्रदेश

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