बादल और बच्चे
सावन का आठवाँ दिन था। सुबह की स्वर्णिम धूप बड़ी रमणीय थी। दोपहर होते तक वातावरण उमस हो गया। शाम
Read Moreसावन का आठवाँ दिन था। सुबह की स्वर्णिम धूप बड़ी रमणीय थी। दोपहर होते तक वातावरण उमस हो गया। शाम
Read Moreअगस्त माह की पंद्रह तारीख थी। सुबह का समय था। ध्वजारोहण के पश्चात प्रभातफेरी के
Read Moreशाॅर्ट रिसेस के बाद क्लास में बैठने की घंटी लगी। बच्चे अपनी-अपनी क्लास में बैठने लगे। कक्षा पाँचवी के छात्र
Read More“तुझसे वो इतनी मुहब्ब़त करता है, तो फिर इस्लाम क्यों नहीं कुबूल कर लेता।” ज़ुबेर मियाँ बोले।
Read Moreगर्मी का मौसम था। स्कूलों की छुट्टियाँ हो चुकी थी। प्रिया का भी स्कूल जाना बंद हो गया था। कक्षा
Read Moreरानी कोयल और मनु बंदर की कलाकारी से सिंघोला बाग ही नहीं; वरन् आसपास की सारी बगिया वाकिफ थी। रानी
Read More“चलो न माँ हमारे साथ सरगुजा। एक साथ रहेंगे हम सब। मेरी नौकरी ऐसी है कि मैं तुम्हें मिलने बार-बार
Read Moreलेबररूम से बाहर निकलते ही डाॅ. सुबोध मरकाम जी बोले- “भरत लाल ! बधाई हो। तुम बाप बन गये। अंदर
Read Moreइस बार ओड़गाँव के गाँधीपारा के बच्चों को होली का बेसब्री से इंतजार था। सबने
Read More“ओ मैनाबाई…! एक नहीं, आज डेढ़ किलो तौल दो। मेहमान आये हैं हमारे यहाँ।” रामरुज मैनाबाई
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