गुलामी की सीख
भारत भिखारियों का देश
यही है आधुनिकता के
लिवास में लिपटे
लोगों का सन्देश
सच में भिखारी
हैं सर्वव्यापक
कौन ऐसा शहर
या गाँव है
जहाँ नहीं इनका ठांव है
न जाने अबतक
कितनों को देखता रहा हूँ
और सोचता भी रहा हूँ
भिखारी भिक्षाटन को
दर-ब -दर भटकता है
भिखारी जानकर ही तो
कोई पास नहीं फटकता है
और हर चौखट पर
अपनी व्यथा
उम्मीद से बकता है
कहीं मिलती सहानुभूति
तो कहीं अपमान गटकता है
बेरोजगारी और भिखारी
हैं दोनों जुदुवाँ भाई
जिसके पास है कटोरा
कहते उसे भिखारी
वहीं दूजा है डिग्रीधारी
पर हैं दोनों भिखारी
पास दोनों के
करुण कथा है
पढ़े-लिखों की
यही व्यथा है
डिग्री नहीं है ये
कटोरा है भीख का
गुलाम बनने की कला
और गुलामी की सीख का
जो सम्मानित हो उन्हें बधाई देना छोटे मुँह बड़ी बात होगी। स्नेही जी को मैंने पहले भी पढ़ा है। वो तो अच्छा ही लिखते हैं। हमारे अहोभाग्य कि हमारे परिमार्जन को आप जैसे दिग्गज यहाँ मौजूद हैं।
आदरणीय मनोज जी, हार्दिक आभार |
भारत कि दुखद सच्चाई बिआं की है, आप को तो लगेगी ही लेकिन जब हम कभी भारत आते हैं हमें बहुत तकलीफ होती है कि लोग कहते हैं भारत उन्ती कर रहा है, किया यही उन्ती है कि डिग्री होल्डर हाथ में डिग्री लेकर दफ्तरों से भीख मांगता फिरता है. जब हम आते हैं हैं तो भिखारी हमारे आगे पीछे इकठे हो जाते हैं तो तरस खा कर कुछ दे देते हैं , मगर कुछ दिनों बाद हम भी उन को धिकारने लगते हैं , कैसा भारत है यह , एक तरफ बड़ी बड़ी कोठिया दुसरी तरफ सड़कों पे वसते लोग .
ये आधुनिक और विकसित शिक्षा पद्धति का परिणाम है जो विश्व में मात्र रोजगारपरक और गुलाम बनाने की ओर अग्रसर है | जहाँ आदमी को आदमी नहीं एक औजार के रूप में देखने कि अरस्तु एवं काल मार्क्स के सोच के अनुरूप ही है | आपने अपनी प्रतिक्रिया दी, धन्यवाद सहित आभार