आओ प्रेम को प्रेममय करते है
न इजहार न गिले शिकवे
प्रेम में आओ कुछ समय
मौन में जीते है …
मै सोचूं तुम लिखो
एक गीत प्रेम का आओ
मिलकर रचते है …
तुम देना गीत को अपना मधुर स्वर
मैं थिरकूं बेसुध सी
प्रेम को आओ
संगीतमय करते है …
मैं तेरे नाम से तू मेरे नाम से जाना जाये
इस तरह आओ प्रेम को
नई पहचान देते है ….
— रजनी चतुर्वदी (बिलगैंया)