लघुकथा

अक्षय सुहाग

नए मेहमान के आगमन की खुशी में अक्षय तृतीया के पावन पर्व पर नीता के लिए सोने की अक्षय बरसात होने वाली थी. कहां तो नीता और परेश आने वाले नए मेहमान की तैयारी में हर्षमग्न थे, कि नीता की सारी दुनिया के रंग बेरंग हो गए थे. परेश के वियोग के साथ आने वाले नए मेहमान को पिता के बारे में वह क्या जवाब देगी? यह प्रश्न उसे सताए जा रहा था. नीता के देवर सुरेश के जन्म से पूर्व ही उसके पिता की मृत्यु के परिणामस्वरूप उसे मनहूस समझकर सभी उसे हाथ लगाने तक से भी गुरेज करते थे. नीता की सास यह बात भूली नहीं थी. इसी बात को लेकर नीता और उसकी सास मानसिक और शारीरिक व्यथा से अत्यंत व्यथित थीं.
अक्षय तृतीया के दिन नीता की सास को न जाने क्या हुआ, कि उसने सुरेश को बुलाया और लाल सिंदूर का पैकेट देते हुए कहा, “नीता की मांग में चुटकी भर सिंदूर भर दे.” उनकी बात सुनकर एक क्षण को तो नीता और सुरेश दोनों एक पल को तो हक्के-बक्के रह गए.
नीता को अक्षय सुहाग का आशीर्वाद देते हुए उसकी सास अत्यंत भावाभिभूत थी.
— लीला तिवानी

*लीला तिवानी

लेखक/रचनाकार: लीला तिवानी। शिक्षा हिंदी में एम.ए., एम.एड.। कई वर्षों से हिंदी अध्यापन के पश्चात रिटायर्ड। दिल्ली राज्य स्तर पर तथा राष्ट्रीय स्तर पर दो शोधपत्र पुरस्कृत। हिंदी-सिंधी भाषा में पुस्तकें प्रकाशित। अनेक पत्र-पत्रिकाओं में नियमित रूप से रचनाएं प्रकाशित होती रहती हैं। लीला तिवानी 57, बैंक अपार्टमेंट्स, प्लॉट नं. 22, सैक्टर- 4 द्वारका, नई दिल्ली पिन कोड- 110078 मोबाइल- +91 98681 25244