भजन/भावगीत

जय हनुमान

हे अंजनी सुत हे पवनपुत्र हे मारुति नंदन जय हनुमान
स्वीकार करो मेरा प्रणाम क्षमा करो अपराध हमारे।
मैं हूँ तेरे चरणों का दास।
हे बालाजी हे राम भक्त।
अपराध हमारे क्षमा करो,
हर संकट से मुझे बचाओ सब काज हमारे पूर्ण करो।
पूजा सुमिरन मैं न जानूँ शीष झुकाकर तुझको मानूँ।
सुबह शाम बस जपूं हनुमानबस इतना ही मुझको ज्ञान।
भक्ति का मुझको दे दो वरदान,पता तुम्हें मैं हूँ अज्ञान।
महिमा तेरी कैसे गाऊँ?तनिक नहीं है इसका भान।
बड़े-बड़े बहु काज किए होप्रभु राम के परम प्रिय हो।
सोने की लंका जलाया था तुमने
खोज खबर सिय का लाये थे तुम।
बारंबार प्रणाम करें हम नटखट भोले भाले हो तुम।
तुमने लक्ष्मण के प्राण बचाए
जब संजीवनी बूटी के संग सुषेण वैद्य को उठा लाये थे तुम।
प्रणाम करें हम तुमको बारंबार
जय बजरंगबली हनुमान
जय श्री राम जय श्री राम गाएं हम सब तेरा गुणगान।
जय हनुमान, जय जय श्री राम,
करो कृपा हो पूरण सब काम।
जय श्री राम जय श्री राम ।
जय हनुमान, जय जय श्री राम।

*सुधीर श्रीवास्तव

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