अब तो लौट आओ मां
मुझे पता है कि तू शायद ही आएगी,
लेकिन फिर भी तेरे आने की राह देख रही हूं मैं।
इतने सालों से तेरे आने की उम्मीद लिए बैठी हूं,
लेकिन अब इस उम्मीद से भी टूट रही हूं मैं।
मेरे उम्मीदों को ऐसे ना तोड़ो मां,
अब तो लौट आओ मां।
भूख न लगने पर भी ये सोचकर खाना खा लेती हूं,
कि मुझे खिलाने के लिए तू नहीं है।
अगर खाते समय तेरी याद आ जाती है तो बिना खाए ही सो जाती हूं मैं।
दुनिया की नजरों में हमेशा हंसती हूं,
लेकिन सिर्फ तेरे लिए हमेशा रोती हूं मैं।
मुझे इतना ना सताओ मां,
अब तो लौट आओ मां।
यू तो मेरे दोस्त हजारों हैं,
लेकिन तेरे बिन एकदम अकेली हूं मैं।
मेरी सहेलियां कहती है कि उनकी सबसे अच्छी दोस्त उनकी मां हैं,
लेकिन मैं ये कैसे कहूं कि मेरी मां होकर भी मेरे पास नहीं है।
तेरी याद में इतना रोती हूं कि,
अब तो आंसू भी नहीं निकलते।
मुझे इतना ना रुलाओ मां,
अब तो लौट आओ मां।।
— ख्यालती टंडन