कविता

सरकारी शिक्षक

समय पर आना समय पर जाना,
समयानुसार कक्षा में पढ़ाना,
पांच मिनट हो गए लेट तो
लिखित में ही कारण बताना,
मध्याह्न भोजन कैसा बना है,
इस पर भी है ध्यान लगाना,
स्व समूह है जिम्मेदार,
पूरा सामान देने को नहीं तैयार,
कभी लकड़ी नहीं कभी तेल नमक,
जांच करने वाले आ जाते धमक,
समझौता नहीं हो गुणवत्ता से,
ऊपर वाले धमकाते हैं,
क्या करे शिक्षक बेचारा,
फिरता रहता है मारामारा,
कभी नून नहीं कभी तेल नहीं,
गुणवत्ता लाना कोई खेल नहीं,
जानकारी तत्काल पहुंचाना है,
तुरंत जानकारी बनाना है,
सोच नहीं पाता है शिक्षक
पढ़ाना है या नहीं पढ़ाना है,
रह रह मीटिंग में जाता है,
न जा पाए तो नोटिस आता है,
स्कूल नहीं कभी आता पालक,
बकरी चराने जाता बालक,
सब कुछ करके सत्रांत में,
लिख लिख शिक्षक बताते वृत्तांत में,
अच्छा परिणाम तो पड़ेगा लाना,
वर्ना छुट्टी में पड़ेगा पढ़ाना,
सब झंझावात झेल के शिक्षक
फिर भी रहता है डटा,
आगे कैसे बढ़े मेरे बच्चे
इस लक्ष्य से नहीं वो पीछे हटा।

— राजेन्द्र लाहिरी

राजेन्द्र लाहिरी

पामगढ़, जिला जांजगीर चाम्पा, छ. ग.495554