कविता

बिटिया

बिटिया का स्वागत हुआ, पाये खूब दुलार।

लाड प्यार भर भर मिले, सुरभित हिय झंकार।।

घर आँगन छम छम चले, मीठी लगती तान। 

महके, चहके मनचली, गाये मधुरिम गान।।

शिक्षा, कौशल से किया, जीवन का श्रृंगार।

तितली सी नभ उड़ चली, बादल के उस पार।।

पंखों में हैं बल भरा, बिटिया भरे उड़ान।

अपनों को भूलो नहीं, भूलो मत अरमान।।

दिल की चाहत हो भले, प्यार चढ़ा परवान।

तोल-मोल करना सदा, सत्य-झूठ पहचान।।

प्रेम नाम ले वासना, बुनती ऐसा जाल।

तड़प-तड़प जीना पड़े, जीवन हो बदहाल।।  

मात पिता सा कौन हैं, शुभचिंतक सोपान।

सोच समझ कर तुम बढ़ो, बनो न अब नादान।।

प्रिया-प्रिया गुंजन करे, बरसाते रसधार।

धोखा करते प्यार में, बनना नहीं शिकार।।

नशा प्यार का चढ़े कभी, साक्षी अग्नि प्रमाण।।

अपने जब सब साथ हो, लुटे न कोई  प्राण।।

बिटिया सुनना बात अब, करो न ऐसी भूल।

जीवन का आनंद लो, फेंको चुनकर शूल।।

*चंचल जैन

मुलुंड,मुंबई ४०००७८

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