कविता

महाशिवरात्रि

सजा है जगमग सारा कैलाश,
छाया चहुं दिश दिव्य प्रकाश,
आई परिणय की शुभ घड़ी,
हो झूमे गाएं धरती-आकाश ।

पहन गल सर्पो का हार विशाल,
जटा जूट गंगा चंद्र चमके भाल,
कर अद्भुत सुन्दर श्रृंगार चले,
बन दुल्हा देवाधिदेव महाकाल ।

देख भोले को मैनावती घबराएं,
भूतनाथ भस्मी अंग-अंग रमाएं,
राजाधिराज की माया है कमाल,
माता पार्वती भी मंद-मंद मुस्काएं ।

बम बम बम बोले भक्तगण प्यारे,
हर-हर महादेव के लगा जयकारे,
हो रही “आनंद” सुधा की बरसात,
शिव शिवा की भक्ति में डूबे सारे ।

बंटे बधाई हो रहा मंगल गुणगान,
पाएंगे बाबा से मनवांछित वरदान,
महाशिवरात्रि पूर्ण आस्था से मनाएंगे,
मिलेगा सारी समस्याओं का निदान ।

— मोनिका डागा “आनंद”

मोनिका डागा 'आनंद'

चेन्नई, तमिलनाडु

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