गीत/नवगीत

स्वारथ हित है प्रेम उमड़ता

स्वारथ का है खेल जगत का, स्वारथ का ही मेल है।

स्वारथ हित है प्रेम उमड़ता, घर बन जाता जेल है।।

स्वारथ के हैं बहन और भाई।

स्वारथ के हैं ताऊ और ताई।

स्वारथ हित जो एक हुए थे,

स्वारथ खोदे फिर से खाई।

स्वारथ हित है सेवा होती, हड्डियों से निकले तेल है।

स्वारथ हित है प्रेम उमड़ता, घर बन जाता जेल है।।

स्वारथ को अब सब स्वीकारो।

स्वारथ जीओ, कभी न हारो।

स्वारथ है, सबकी संतुष्टि,

स्वारथ में भी, हक ना मारो।

स्वारथ ही है जीवन यात्रा, स्वारथ मौत की सेल है।

स्वारथ हित है प्रेम उमड़ता, घर बन जाता जेल है।।

स्वारथ हित है पूजा होती।

स्वारथ हित खुलती है धोती।

स्वारथ हित है कोख बिक रही,

स्वारथ हित बिकती है पोती।

स्वारथ में संबन्ध बिक रहे, स्वारथ की रेलम-पेल है।

स्वारथ हित है प्रेम उमड़ता, घर बन जाता जेल है।।

डॉ. संतोष गौड़ राष्ट्रप्रेमी

जवाहर नवोदय विद्यालय, मुरादाबाद , में प्राचार्य के रूप में कार्यरत। दस पुस्तकें प्रकाशित। rashtrapremi.com, www.rashtrapremi.in मेरी ई-बुक चिंता छोड़ो-सुख से नाता जोड़ो शिक्षक बनें-जग गढ़ें(करियर केन्द्रित मार्गदर्शिका) आधुनिक संदर्भ में(निबन्ध संग्रह) पापा, मैं तुम्हारे पास आऊंगा प्रेरणा से पराजिता तक(कहानी संग्रह) सफ़लता का राज़ समय की एजेंसी दोहा सहस्रावली(1111 दोहे) बता देंगे जमाने को(काव्य संग्रह) मौत से जिजीविषा तक(काव्य संग्रह) समर्पण(काव्य संग्रह)

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