लघुकथा

हैवान पड़ोसी

रात के दस बज रहे थे की जोरों की शोर सुनाई पड़ी, दौड़ कर खिड़की से झांकने पर देखे मेरे ही चारदिवारी को पड़ोसी बाप बेटा तोड़़ रहा और घर की महिला गाली गलौज कर रही है ।हमने आबाज दी तो मारने दौड़ पड़े। भाग कर घर के अंदर आ गया और दरबाजा बंद किये।
सांसे रूक नही रही थी ,वो लोग हत्या करके सजा पा चुके हैं ,बेटा हाल ही में जेल से बाहर आया है। एक सौ बारह नम्बर पर डायल किया । पुलिस आई देखकर चली गयी ।
रात भर सो नहीं पाये , सुबह थाना में शिकायत दर्ज किये , बुलाया गया उस अपराधी परिवार को पर थाना में महिला सदस्य आई। पुरुष से कोई नही ।आगे गलत नही करेंगें थाना में लिखकर थाना प्रभारी को दिया । मेरी सांसें वापस आई।
हमलोग बाहर रहते हैं जिससे यहां परिचय के लोग कम हैं पर छवि साफ सुधरी है। हमलोग समाज में प्रतिष्ठित परिवार में जाने जाते हैं हमेशा दूसरों की मदद करने में तत्पर रहते हैं । विवाद से दूर रहते हैं पर दुर्भाग्य की पड़ोसी अपराधिक लोग है जो जान पे खतरा का डर लगा रहता है ।
अपराध बेलगाम हो जाये तो प्रशासन को भी परेशानी होती है तो आम आदमी को कितना तकलीफ होती होगी जो पीड़ित व्यक्ति है वही बता सकता है ।
अचानक सुबह पांच फिर शोरगुल मचा तो खिड़की से देखा गाली गलौज करते हुए बाहर निकलने को कह रहा था की हम पर थाना में शिकायत करते हो जाओ बुला लो
मारपीट निश्चित थी पर मैने धीरज से काम लिया दो घंटे बाहर ही नही निकला ।
थाना प्रभारी को फोन करके सारी परिस्थिति से अवगत करवाया तो पता चला ये लोग थाना का कोई महत्व नही देते ,अधिकारी भी बल प्रयोग से कतराते है क्या कारण है पता नहीं। हम तो न्याय के लिए परेशान हैं। जब पुलिस प्रशासन ही अपराधी से डरता हो तो आम आदमी को कितना तकलीफ होगी ।
ये है बिहार के एक जिला की हैवान पड़ोसी की हैवानियत । कहां न्याय खोजें, जब प्रशासन लाचार हो कौन सहयोग करके न्याय दिलायेगा? हाय रे हैवान पड़ोसी ।

— शिवनन्दन सिंह

शिवनन्दन सिंह

साधुडेरा बिरसानगर जमशेदपुर झारख्णड। मो- 9279389968

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