कहाँ ले पाते मजे जिंदगी के
कहाँ ले पाते मजे जिंदगी के,कल का इन्तजार कर के ।दिन-रात कटती रहती जिंदगी,सोचते उलझने समेट कर के। बचपन नादानी
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Read Moreजितने बसंत हमने देखे हैं,उतने पतझड़ भी देखे हैं।नयनों में सपने पलते देखे,पल पल टूटते भी देखे हैं । हमने
Read Moreरात के दस बज रहे थे की जोरों की शोर सुनाई पड़ी, दौड़ कर खिड़की से झांकने पर देखे मेरे
Read Moreतुम हो जब तक तभी तक आनंद मेरा,तुम आई तो जीवन में आया नया सबेरा ।थकी -थकी सी जिन्दगी दर्द
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