क्रूरता के विरुद्ध
किसी की नफरत का
कोई असर ना हो दिल पर
खुद से इतना प्रेम करना है
इस दुनिया की क्रूरता के विरुद्ध
डट के खड़े रहना है
आक्रमण मेरा स्वभाव नही
पर पीठ दिखाकर भाग जाना
मेरी फितरत भी नही
जो अंदर से जहरीले हैं
वो बेशक फैलाएंगे नफरत का धुआं
मैं कोशिश करती रहूंगी
चिड़िया की बोली समझने की
फूलों के स्पर्श में अपनापन ढूंढने की
याद करूंगी हर वो वाकया की
जब मुझे टूट कर बिखरना था
पर तब किस वजह से मैं
साहस का हाथ थाम
आगे बढ़ी थी
उस एक कारण के लिए मुझे
अब भी जीना है
नदी के प्रवाह सा चट्टानों को
मात देकर बस निरन्तर
आगे बढ़ना है…!
— सविता दास सवि