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हिंदू और साई बाबा: कुछ शंकायें

हिन्दुओं में एक बड़ा तबका साईं बाबा को मानने वाला तथा उनका पूजक है, साईं के एकल मंदिर के आलावा शायद ही कोई ऐसा मंदिर होगा जहां उनकी मूर्ति न हो | साईं संध्या, साईं भजन जैसी सामग्रियां शायद और किसी भी हिन्दू देवी- देवता से ज्यादा उपलब्द हो बाजार में |

ब्रह्मण जो कभी राम-कृष्ण का भक्त हुआ करता था अब अब साईं बाबा का पक्का भक्त बन गया है क्यूँ की वो साईं के बड़ते हुए भक्तो की संख्या और उसपे चढने वाले चढावे के लालच को कैसे छोड़ सकता है ? ….इसलिए अब हर मंदिर में उनकी मूर्ति स्थापित करता है, पर ये वही ब्रह्मण वर्ग है जिसने साईं को जीते-जी कभी मंदिर में प्रवेश नहीं करने दिया ….और अब उनकी मूर्ति मंदिर में स्थापित करता है और दिन रात साईं के गुण गाने में मग्न है |

साईं बाबा अपने चमत्कारों के लिए मशहूर हैं उनके भक्तो का विश्वास है यदि कोई एक बार शिर्डी में जाके कोई उनके दर्शन कर ले तो उसके सब दुःख दूर हो जाते हैं, इसलिए आम आदमी तो आम आदमी बड़ी हस्तियाँ भी शिर्डी में अपना माथा टेकने जरूर जाती हैं| उनके भक्त ‘साईं -राम ‘ बोलते हैं मतलब पहले साईं बाद में राम …यानि साईं राम से भी बड़े हो गए |

साईं बाबा का जीवन काल 1835 से 1918 तक था, उनके जीवन काल के मध्य हुई घटनाये जो मन में शंकाएं पैदा करती हैं कि क्या वो सच में भगवान थे, क्या वो सच में लोगो का दुःख दूर कर सकते है?

1- १८५७ की पहली आज़ादी की लड़ाई में अंग्रेजो द्वारा लाखो भारतीयों का मारा जाना|

साईं बाबा इन लोगो को मारने से क्यूँ नहीं रोक पाए?

२- साईं बाबा के जीवन काल के दौरान बड़े भूकंप आये जिनमें हजारो लोग मरे गए
(a ) १८९७ जून शिलांग में
(b ) १९०५ अप्रैल काँगड़ा में
(c ) १९१८ जुलाई श्रीमंगल असाम में

देखे – http://www.imd.gov.in/section/seismo/static/signif.हतं

साईं बाबा भगवान होते हुए भी इन भूकम्पों को क्यूँ नहीं रोक पाए ?…क्यूँ हजारो को असमय मरने दिया ?

3 – भारत का सबसे बड़ा अकाल साईं बाबा के जीवन के दौरान पड़ा
(a ) 1866 में ओड़िसा के अकाल में लगभग ढाई लाख भूख से मर गए
(b) 1873 -74 में बिहार के अकाल में लगभग एक लाख लोग प्रभावित हुए… भूख के कारण लोगो में इंसानियत ख़त्म हो गयी थी|
(c ) 1875 -1902 में भारत का सबसे बड़ा अकाल पड़ा जिसमें लगभग 6 लाख लोग मर गए|

देखें – http://en.wikipedia.org/wiki/Famine_in_इंडिया

साईं बाबा ने इन लाखो लोगो को अकाल से क्यूँ पीड़ित होने दिया यदि वो भगवान या चमत्कारी थे? क्यूँ इन लाखो लोगो को भूख से तड़प -तड़प कर मरने दिया?

4 – बाबा ने ऐसी कौन सी बात बताई या किस बात का ज्ञान दिया हो वेदों, उपनिषद, दर्शन या और हिन्दू ग्रंथो में उपलब्द नहीं थे ?

जब साईं ने कुछ अलग नहीं बताया तो फिर उनकी बाते इन ग्रंथो से ऊपर कैसे हो गई ?

5 – अधिकतर नेता, अभिनेता-अभिनेत्री चुनाव में जीतने अथवा अपनी फ़िल्में कामयाब करवाने के लिए शिर्डी जाते है, परन्तु कितने हैं जिन्हें चुनाव या फिल्मों में कामयाबी मिलती है, साईं सब को कामयाब क्यूँ नहीं कर देते?

6 – क्या 33 कोटि देवी देवता, राम, कृष्ण, शंकर, विष्णु सब पुराने हो गए या वो अब काम के नहीं रहे, या वो अब लोगो की इच्छाएं पूरी करने में सामर्थ नहीं जो नये भगवान साईं बाबा की जरूरत पड़ गयी ?

7 – साईं बाबा एक मुस्लिम थे और जीवन भर मस्जिद में रहे, कुरान पढ़ते थे… उन्हें मुस्लिम की तरह दफनाया गया, उनकी पूजा क्यूँ? कितने मुस्लिम हैं जो साईं बाबा की तस्वीर अपने घर पर लगते हैं… उन्हें पूजते हैं?

हमेशा हिन्दू ही क्यूँ हर एक को पूजने के लिए तैयार रहता है? क्या उसे अपने पुराने भगवानो पर भरोसा नहीं? क्यूँ ब्रह्मण हमेशा सिर्फ अपने पेट के बारे में सोचता है और आमदनी कैसे बढे उसके लिए नित नये भगवान बनाने में लगा रहता है ? जिस तरह से एक दुकानदार अपनी दुकान पर रोज नये वस्तुए लाता है अपनी दुकानदारी चमकाने के लिए?

संजय कुमार (केशव)

नास्तिक .... क्या यह परिचय काफी नहीं है?

5 thoughts on “हिंदू और साई बाबा: कुछ शंकायें

  • गुरमेल सिंह भमरा लंदन

    केशव जी आप धमाकेदार लिखते हैं , जो भी आपने कहा मैं सौ फी सदी आप से सहमत हूँ . अब यह धर्म अस्थान कम और सुपर स्टोर ज़िआदा लगते हैं . मुझे दुःख इस बात का है कि अगर किसी ने भगवान् को मानना ही है तो इतना पैसा , सोना , चांदी चडाने का किया मकसद है . इसी लिए तो मैं भी बार बार कहता हूँ कि जो बाहिर से हमलावर आये वो मंदिरों को पहले लूटते थे और म्न्द्रों को तोड़ देते थे किओंकि कई दफा मंद्रों के नीचे दब्बे हुए महाराजाओं के दान किये हुए खजाने होते थे . यह भी मैं जोर देकर कहता हूँ कि किसी भी देवता ने आ कर नहीं बचाया . हिन्दुस्तान की औरतों की नीलामी टके टके में गजनी के बाजारों में नीलाम हुई और कोई देवता बचाने को नहीं आया . आप का लेख अत्ति अच्छा है .

    • केशव

      प्रणाम, गुरमेल जी।
      यह कडवा मगर सत्य है की भारत को बाहरी लोगो ने अपितु अपने को भारतीय कहने वालो ने ही इसे बर्बाद किया । जातिवाद एक बहुत बड़ा कारण रहा है इसका, अपने को सवर्ण कहने वालो ने अपने ही धर्म के एक अंग को पशु से भी बदतर समझा । जिसका परिणाम यह हुआ जब भी कोई बाहरी आक्रमण कारी आया तो एक बड़े और शोषित वर्ग ने कोई प्रतिक्रिया नहीं की इसके विरुद्ध। और मुट्ठी भर लोग आसानी से देश में लूट मार करते रहे।
      मंदिरों में अकूत धन जमा रहता और पुजारी मौज मनाता जबकि आम जनता भूखे मरती इसलिए मंदिर लुटते रहे और लोग चुप चाप देखते रहे ।
      आज भी बहुत कुछ वैसा ही है

    • विजय कुमार सिंघल

      गुरमेल सिंह जी, आपका कहना बिलकुल सत्य है. लेकिन आप मंदिरों और गुरुद्वारों में श्रृद्धा पूर्वक दिए गए दान को नहीं रोक सकते. हमें उस राशि का सदुपयोग करने की कोशिश करनी चाहिए. उनमें जो चढ़ावा आता है उसका उपयोग सामजिक कार्यों के लिए ही किया जाना चाहिए. समाज के लिए विद्यालय, धर्मशालाएं, अस्पताल आदि बनवाने चाहिए. उस धन को एकत्र करके रखना बहुत गलत है. इससे चोर और लुटेरों के आने की सम्भावना भी बढती है.

  • विजय कुमार सिंघल

    बहुत अच्छा लेख. अनेक स्थापित देवी देवताओं को छोड़कर साईं बाबा को पूजना मूर्खता के सिवा कुछ नहीं. उसकी मूर्ति हिन्दू मंदिरों में लगाना तो घोर आपत्तिजनक है. अब हिन्दुओं को इस मूर्खता से बाज आना चाहिए.

    • केशव

      प्रणाम सिंघल साहब।
      धन्यवाद

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