प्रीत बनकर आप आये ज़िन्दगी में तो
प्रीत बनकर आप आये ज़िन्दगी में तो
ज़िन्दगी लगने लगी है ज़िन्दगी मुझको।
हमसफ़र जब आप बनकर साथ हो मेरे
चाँद के बिन मिल रही है चाँदनी मुझको।।
टूटकर बिखरे हुए जो ख्वाब थे आप आये तो अलंकृत हो गये
तार मन के थे बहुत खामोश जो आप आये तो वो झंकृत हो गये
घोर तम भी अब मुझे लगता नही है तम
प्यार की जब से मिली है रोशनी मुझको…
हमसफ़र जब आप बनकर साथ हो मेरे
चाँद के बिन मिल रही है चाँदनी मुझको…
खिल गयीं कलियाँ खिज़ा के दौर में देहरी पर अल्पनाएं सज गयीं
झूमने गाने लगा मन प्रीत में ज़िन्दगी की कल्पनाएं सज गयीं
सोच से भी जो परे थी आपने आकर
सौंप दी वो ज़िन्दगी की हर खुशी मुझको…
हमसफ़र जब आप बनकर साथ हो मेरे
चाँद के बिन मिल रही है चाँदनी मुझको…
सोच से भी दूर थी मंज़िल कभी आ गयी नज़दीक यूँ लगने लगी
प्यार जितना आपसे मिलने लगा प्यास उतनी प्यार की जगने लगी
हो गयी मुझ पर इनायत आपकी हमदम
रास अब आने लगी है आशिकी मुझको…
हमसफ़र जब आप बनकर साथ हो मेरे
चाँद के बिन मिल रही है चाँदनी मुझको…
देखता हूँ जब कभी दर्पण सनम आप ही बस आप आते हो नज़र
साँस में भी आपकी खुशबू घुली हो रहा ये प्यार का कैसा असर
कह रहा है मन करूँ सज़दा झुका कर सर
प्यार अब लगने लगा बंदगी मुझको…
हमसफ़र जब आप बनकर साथ हो मेरे
चाँद के बिन मिल रही है चाँदनी मुझको…
सतीश बंसल
१८.०६.२०१७