गीतिका/ग़ज़ल

कोरे सपने देख विजय का जश्न मनाने वाले लोग

कोरे सपने देख विजय का जश्न मनाने वाले लोग
पछताते हैं सच्चाई से आँख चुराने वाले लोग

किस्मत से यदि मिल जाएं तो दिल में धड़कन से रखना
मुश्किल से मिलते हैं सच्चा प्यार निभाने वाले लोग

वक्त निकलने पर राहों में ख़ार बिछाने लगते हैं
वक्त पड़े स्वागत में अपनी आँख बिछाने वाले लोग

अक्सर तन्हाई में अश्क बहाते देखे हैं हमने
महफ़िल में सबसे ज़्यादा हँसने मुस्काने वाले लोग

सिर्फ़ हमारी कुंठाओं के चलते पाते हैं सत्ता
बीच दिलों के नफ़रत की दीवार उठाने वाले लोग

देखें सच्चाई को आखिर रोक सकेंगे कितने दिन
दंभ हनक मिथ्या के हक़ में शोर मचाने वाले लोग

सच बोलूँ तो दुश्मन से भी ज़्यादा घातक हैं बंसल
मुल्क परस्ती के साए में द्वेष बढ़ाने वाले लोग

सतीश बंसल
१७.०९.२०२०

*सतीश बंसल

पिता का नाम : श्री श्री निवास बंसल जन्म स्थान : ग्राम- घिटौरा, जिला - बागपत (उत्तर प्रदेश) वर्तमान निवास : पंडितवाडी, देहरादून फोन : 09368463261 जन्म तिथि : 02-09-1968 : B.A 1990 CCS University Meerut (UP) लेखन : हिन्दी कविता एवं गीत प्रकाशित पुस्तकें : " गुनगुनांने लगीं खामोशियां" "चलो गुनगुनाएँ" , "कवि नही हूँ मैं", "संस्कार के दीप" एवं "रोशनी के लिए" विषय : सभी सामाजिक, राजनैतिक, सामयिक, बेटी बचाव, गौ हत्या, प्रकृति, पारिवारिक रिश्ते , आध्यात्मिक, देश भक्ति, वीर रस एवं प्रेम गीत.