कविता

बसंत

बसंत आगमन की महक
फिजा में महकने लगती है,
ठंड की विदाई ,नव कोंपलों से
हरे भरे पेड़ संवरने लगती है
चहुंओर छा जाती हरियाली
फूलों की रंगीनियां
रंग बिरंगे फूलों की छटा
कलकल करती नदियां,
पक्षियों की चहचहाहट
आनंद का सुखद अहसास
चंद्र की मनमोहक चांदनी
स्वच्छ निर्मल आकाश
तरोताजा करती हवाएं
पकती फसलें, सरसों के पीले फूल
मन को आकर्षित कर जाएं
मानो बसंत आगमन का
स्वागत कर खुशियां व्यक्त करते
पानी को ढंकने को उद्दत
सरोवर में कमल खिलते
नव उर्जा ,जोश का संचार करते
नयी उम्मीद, विश्वास भरते,
भूलकर सारे गमों को
उत्साह, उमंग से जीने की प्रेरणा देते
आसमान में अठखेलियाँ करते
पक्षी बसंत के स्वागतार्थ आतुर दिखते
बसंत का स्पष्ट संकेत देते।

 

*सुधीर श्रीवास्तव

शिवनगर, इमिलिया गुरूदयाल, बड़गाँव, गोण्डा, उ.प्र.,271002 व्हाट्सएप मो.-8115285921