कुण्डली/छंद

आयी होली    

प्रेम रंग भर पिचकारी में, कृष्ण मचाये धूम।

गोप गोपियाँ साथी सारे, नाच रहे वे झूम।।

खोये सुध बुध राधा रानी, अँखियाँ छलके नीर।  

मीठी धुन सुन दौडी राधा, यमुना जी के तीर।।

*चंचल जैन

मुलुंड,मुंबई ४०००७८

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