कविता

कविता

ज़िन्दगी सिर्फ फूलों की
सेज भर नहीं है
कांटों का सफर भी है।
तुमने चुने थे फूल
सजाने को ज़िन्दगी
आखिर कहां से आ गये
कांटें उसमें चुभने को
पता नहीं चला।
कांटों की चुभन
इतनी तेज थी कि
कांप गया सारा तन – बदन।
रुक – रुक जाती सांसें
कैसे बढ़ते कदम
आगे कुछ पाने को
कुछ नया करने को
ज़िन्दगी में।
फूल और कांटों बीच
हमें लड़ना पड़ेगा
अंधेरों से भी रात – दिन।
तब कहीं जाकर
उजाला भरेगा जीवन में
दुनिया होगी खूबसूरत
और शायद
ज़िन्दगी भी।

— वाई. वेद प्रकाश

वाई. वेद प्रकाश

द्वारा विद्या रमण फाउण्डेशन 121, शंकर नगर,मुराई बाग,डलमऊ, रायबरेली उत्तर प्रदेश 229207 M-9670040890