ग़ज़ल
नदियां सागर जाती हैं।सब कुछ वहां लुटाती हैं।बर्फीले शिखरों से चल,रेतीले पथ आती हैं।सर्पीली राहों में चल,यौवन को लहराती हैं।नये
Read Moreढूंढ़ता हूं मां कोतिरती हवाओं मेंबादलों मेंकाली घटाओं मेंबस ढूंढ़ता हूं मां को।हर सुबह उठकरघड़ी पर टिकी निगाहों के बीचजाते
Read Moreढाई आखर ने सदा,रचा विश्व भूगोल।प्रेम यही तो पढ़ सका पूरी पृथ्वी गोल।। दूर सदा उससे रहो, पड़े जो भोग
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