कविता
सर्वत्र मौन की दशाकिसी की विजय नहींसामूहिक कायरता का चिन्ह है।मौन और एकांत के बीचबिलखता है कोई सपनाजीने को जीवन
Read Moreप्यासे को पानी मिला अधरों की मुस्कान।बस इतनी सी चाहत लिए फिरें इंसान।।गांवों में अब है कहां, हरियाली की आस।सांसों
Read Moreढूंढ़ता हूं मां कोतिरती हवाओं मेंबादलों मेंकाली घटाओं मेंबस ढूंढ़ता हूं मां को।हर सुबह उठकरघड़ी पर टिकी निगाहों के बीचजाते
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