ग़ज़ल
दिल में थी कड़वाहट लेकिन रिश्ते मुझे निभाना थाउनके दर से गुजर गया जो अपना एक जमाना था।वह ताकतवर था
Read Moreप्यासे को पानी मिला अधरों की मुस्कान।बस इतनी सी चाहत लिए फिरें इंसान।।गांवों में अब है कहां, हरियाली की आस।सांसों
Read Moreढूंढ़ता हूं मां कोतिरती हवाओं मेंबादलों मेंकाली घटाओं मेंबस ढूंढ़ता हूं मां को।हर सुबह उठकरघड़ी पर टिकी निगाहों के बीचजाते
Read Moreढाई आखर ने सदा,रचा विश्व भूगोल।प्रेम यही तो पढ़ सका पूरी पृथ्वी गोल।। दूर सदा उससे रहो, पड़े जो भोग
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