गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

कुछ ऐसा दीदार हुआ
कैसा तो संसार हुआ।
नफ़रत की अंधी गलियों में,
किसको किससे प्यार हुआ।
मूल्यों को खोकर ही जाना,
क्या -क्या तो व्यापार हुआ।
कोई पद है कहां निरापद,
चलकर ही इजहार हुआ।
इश्तहार में लिपटी दुनिया,
सच का बंटाधार हुआ।
कर्म पथों पर चले बिना,
किसका बेड़ा पार हुआ।
मानवता जब – जब रोती,
जिन्दा क्या संसार हुआ।
युद्ध भूमि में खड़े योद्धा,
किस- किस का संहार हुआ।
दिव्य सृष्टि की राहों में,
प्यार भरा मनुहार हुआ।

— वाई. वेद प्रकाश

वाई. वेद प्रकाश

द्वारा विद्या रमण फाउण्डेशन 121, शंकर नगर,मुराई बाग,डलमऊ, रायबरेली उत्तर प्रदेश 229207 M-9670040890