कविता
प्रेम उसी तरह आता हैजिस तरह आती हैं रूहें।रूप – राशिरस -गंधथोड़ी इच्छावासना थोड़ी -थोड़ी।स्पर्श की चाहतसौंदर्य में हीछुपी रहती
Read Moreबेहद आत्ममुग्धता मेंजी रहे हैं वे।उनकी संतानेंपहुंच चुकी हैं बड़े – बड़े पदों परबहुत ज्यादा पढ़ लिख कर।उन्होंने बना दिये
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