ग़ज़ल
आग,बादल, हवा, पानी।ज़िन्दगी की यह कहानी।यूं महक उठती कहीं भी,हसरतों की रातरानी।साजिशों से लड़ न पाती,हो गयी पागल जवानी।प्यास से
Read Moreबेहद आत्ममुग्धता मेंजी रहे हैं वे।उनकी संतानेंपहुंच चुकी हैं बड़े – बड़े पदों परबहुत ज्यादा पढ़ लिख कर।उन्होंने बना दिये
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