ग़ज़ल
सच में कोई कहानी है ।
जिन्दा एक निशानी है।
पलती एक ज़िन्दगी का,
पल- पल ही तूफानी है।
ठहरा समय कहां आखिर,
उसमें एक रवानी है।
सागर का मंथन जारी,
अमृत उसका पानी है।
ब्रह्मा से शापित स्त्री,
दुर्गा और भवानी है।
आंखों से ओझल होती,
राह मेरी पहचानी है।
प्यार मोहब्ब्त में अब तो,
डूबी हुई जवानी है।
अर्थ खोलते शब्दों से,
करते हम नादानी है।
साथ मेरे किरदार चले,
मेरी यही बयानी है।
— वाई. वेद प्रकाश
