कविता

मां

मां
एक ऐसा शब्द
देता है अनुभूति
जिसमें समायी है
विशालता समूचे ब्रह्माण्ड की।
दुःखों में डूबा तो
पाया सुखों की छांव
मां के आंचल तले।
मां तो मां है
धरती की सारी सृष्टि
समाहित किए
खुद में।
मां से सीखा
जीवन जीना
कुछ कर गुजरने
वाली प्रतिबद्धता
अनुशासन
असंभव चीजें
बना देती संभव वो
मां की याद
में भीगती हुई आंखों की कोरें
आज मां नहीं हैं
नतमस्तक हूं
उनके चरणों में
मां को सादर
प्रणाम!

— वाई. वेद प्रकाश

वाई. वेद प्रकाश

द्वारा विद्या रमण फाउण्डेशन 121, शंकर नगर,मुराई बाग,डलमऊ, रायबरेली उत्तर प्रदेश 229207 M-9670040890