रंगमंच पर निभा रहे किरदार
सजा है विश्व के पटल में रंगमंच,
सभी निभा रहे किरदार कर संच।
हरेक पड़ाव से गुजर रहीं जिन्दगी,
एक-दूसरे के साथ करती बन्दगी।
कुछ ही कलाकार कर देते गन्दगी,
सब सही करते विधाता दिल्लगी।
सजा है विश्व के पटल में रंगमंच,
सभी निभा रहें किरदार कर संच।
ईश्वर ने भी क्या रचा है ये संसार,
सबके दामन में भरपूर दिया प्यार।
कब किसके हिस्से में आ जाये हार,
कभी खुलते रहेंगे किस्मत के द्वार।
सजा है विश्व के पटल में रंगमंच,
सभी निभा रहें किरदार कर संच।
गुजरती गई जिन्दगी देखते ख्वाब,
करते रहे अभिनय झाड़ते है रुबाब।
यू एक-दूजे का मिलता रहा सहवास,
बुझती रही प्यास,खिलते रहें गुलाब!
जीवन चलता रहें अदाकारी हैं शबाब।
— संजय एम तराणेकर