ग़ज़ल
देख तड़पेंगे सदा उल्फ़त अगर हो जायेगी।
चुप रहेंगे हम भले सबको ख़बर हो जायेगी।।
जो चले हो अब हमारे संग तुम तो जान लो।
छोड़ना मत तुम हमें वरना क़हर हो जायेगी।।
आज हम तो सोचते हैं घर बसाएँ प्यार का।
साथ तेरा जो मिला आसां डगर हो जायेगी।।
दे सको उल्फ़त सदा देना हमें तो सुनो।
प्यार में तब ज़िंदगी ही तर – ब – तर हो जायेगी।।
जो दुखों की शाम देखो घेर हमको ले यहाँ।
ग़म न कर तू सुन अभी ले फिर सहर हो जायेगी ।
हो गया सपना धराशायी यहाँ तू सोच ले।
( ज़िंदगी की हर कहानी बे असर हो जायेगी।। )
अब जिएँ तेरे लिए ही देख रहते हैअअं यहाँ।
हम फ़ना हों हर घड़ी तेरी नज़र हो जायेगी।।
— रवि रश्मि ‘अनुभूति’