गीत/नवगीत

छुपे हुए सच को बाहर आने दीजिए

छुपे हुए सच को बाहर आ जाने दीजिए।
लिखा जिसने गाना उसको गाने दीजिए।।

छुपना और छुपाना क्यों,
झूठ ज्यादा फैलाना क्यों,
सच्चाई से डर जाना क्यों,
दिखावा ही दिखाना क्यों,
मत खाओ अकेले सबको मिल खाने दीजिए।

खेल है आपका डाटा का,
इंतजार उनको आटा का,
भोजन महुआ लाटा का,
इनको चिंता है घाटा का,
मासूमियत उन बच्चों में भी आ जाने दीजिए।

देश के हर संसाधन पर क्यों हक़ तेरा,
क्यों कहते नभ से थल तक मेरा मेरा,
क्यों भूले हो इंसानियत का घेरा घेरा,
रहो सीमित वहीं पर ही जहां है बसेरा,
प्रकृति का ये फर्ज़ मिल जुल निभाने दीजिए।

— राजेन्द्र लाहिरी

राजेन्द्र लाहिरी

पामगढ़, जिला जांजगीर चाम्पा, छ. ग.495554

Leave a Reply