सामाजिक

अश्लील और कानफोड़ू गानों से करें परहेज। 

शादी एक पवित्र और भावनात्मक अवसर होती है, जिसमें दो परिवारों का मिलन होता है। इस अवसर पर संगीत का चयन केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि यह हमारे मूल्यों, रिश्तों और भावनाओं का भी सम्मान करना चाहिए। शादी में बजने वाले गाने रिश्तों की गरिमा, परिवार की भावनाओं और संस्कृति को भी दर्शाते हैं।

शादी एक खास अवसर होता है, जो दो परिवारों की सांस्कृतिक, पारिवारिक और भावनात्मक दुनिया को जोड़ता है। यह केवल दो लोगों का मिलन नहीं, बल्कि दो परिवारों का मिलन है, जिसमें भावनाओं, संस्कारों और परंपराओं का आदान-प्रदान होता है। संगीत इस आयोजन का अभिन्न हिस्सा है, लेकिन इसका चयन बेहद सावधानी से किया जाना चाहिए। केवल मस्ती और डांस तक सीमित न होकर संगीत को हमारे मूल्यों, रिश्तों और भावनाओं का सम्मान करना चाहिए। 

गानों का हमारी भावनाओं और मूल्यों से संबंध

शादी में बजने वाले गाने रिश्तों की गरिमा, परिवार की भावनाओं और संस्कृति का आदान-प्रदान करते हैं। गानों के बोल और धुनों का असर हमारे मनोबल और शादी के समग्र अनुभव पर पड़ता है। शादी एक पारिवारिक आयोजन होता है, जिसमें विभिन्न आयु समूहों के लोग उपस्थित होते हैं। माता-पिता, दादा-दादी, चाचा-चाची और छोटे बच्चे भी समारोह में होते हैं। ऐसे में गानों के बोल शालीन और मर्यादित होने चाहिए ताकि किसी की भावनाओं को ठेस न पहुंचे। जैसे कि, जब हम शादी के सादे और गंभीर समारोहों में भाग लेते हैं, तो हमें यह याद रखना चाहिए कि यह एक गहरे बंधन का प्रतीक है, और इस समय का संगीत वही होना चाहिए जो इस सच्चाई को सम्मानित करे। शादी का संकल्प जीवनभर के लिए होता है। यह एक ऐसा वचन होता है जिसमें दोनों पक्षों का प्यार, विश्वास और समर्पण शामिल होते हैं। ऐसे में गाने भी ऐसे होने चाहिए जो प्रेम, रिश्ते और परस्पर सम्मान की भावनाओं को व्यक्त करें। ब्रेकअप या धोखा पर आधारित गाने, जैसे “चन्ना मेरेया” या “भुला दूंगा”, इस अवसर के लिए सही नहीं होते। ये गाने शादी के संकल्प के साथ मेल नहीं खाते हैं।

हर शादी की अपनी संस्कृति, परंपराएं और रीति-रिवाज होते हैं। विशेषकर भारतीय शादियों में पारंपरिक संगीत और धार्मिक अनुष्ठानों का बहुत महत्व है। ऐसे में, गानों के चयन में हमें यह सुनिश्चित करना चाहिए कि वे किसी भी धार्मिक या सांस्कृतिक मान्यताओं को ठेस न पहुंचाएं। उदाहरण के तौर पर, यदि शादी एक विशेष धार्मिक रीति से हो रही है, तो हमें इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि संगीत इस परंपरा के अनुरूप हो। शादी एक उत्सव होता है, और संगीत का मुख्य उद्देश्य इस खुशी को बढ़ाना है। जो गाने उत्साह और खुशी से भरे होते हैं, वे इस अवसर को और खास बना सकते हैं। इसके विपरीत, उदास या नकारात्मक गाने जैसे “तू जो नहीं”, “तुम ही हो” आदि माहौल को फीका कर सकते हैं। संगीत को चुनते समय हमें यह ध्यान रखना चाहिए कि वह हर किसी के मन को खुशी और सकारात्मकता दे।

किन गानों को “डू नॉट प्ले” लिस्ट में रखें?

शादी के संगीत का चयन करते समय यह सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है कि हम उन गानों से बचें जो अश्लील, द्विअर्थी या असंवेदनशील हों। शादी का माहौल पवित्र और पारिवारिक होता है, और इसलिए हमें उन गानों से बचना चाहिए जो भाषा या भावनाओं से मर्यादा लांघते हों। उदाहरण के तौर पर, “मुन्नी बदनाम” और “शीला की जवानी” जैसे गाने इस अवसर के लिए उपयुक्त नहीं होते। शादी एक प्रेम और वचन का उत्सव है, और ऐसे गाने जो ब्रेकअप, धोखा या अस्थिर रिश्तों पर आधारित होते हैं, जैसे “चन्ना मेरेया” या “भुला दूंगा”, शादी के माहौल के अनुकूल नहीं होते। शादी के समय यदि गाने नशे या अन्य नकारात्मक प्रवृत्तियों को बढ़ावा देते हैं, तो यह माहौल के अनुरूप नहीं होते। “दारू देसी”, “लुंगी डांस”, और “माई ड्रिंकिंग” जैसे गाने शादी के गरिमामय माहौल को प्रभावित कर सकते हैं। कुछ गाने जो केवल तेज़ आवाज़ और शोर से भरे होते हैं, जैसे कि अत्यधिक बेस वाले गाने या DJ ट्रैक्स, वे कभी-कभी माहौल को कष्टकारी बना सकते हैं। इनसे बचने के लिए संगीत का चयन इस तरह किया जाना चाहिए कि हर कोई उसे आसानी से सुन सके और उसका आनंद ले सके। हमारी शादी में सभी वर्गों और समुदायों के लोग उपस्थित होते हैं। ऐसे में किसी भी धार्मिक या जातिगत भावनाओं को आहत करने वाले गानों से बचना चाहिए। इन गानों से बचने के लिए यह जरूरी है कि गानों का चयन एक समानता, सम्मान और प्रेम को व्यक्त करें।

कैसे बनाएं संतुलित प्लेलिस्ट?

संतुलित और विविधतापूर्ण प्लेलिस्ट बनाने के लिए कुछ विशेष टिप्स का पालन किया जा सकता है: शादी में दूल्हा-दुल्हन के साथ-साथ परिवार और दोस्तों की पसंद का भी ध्यान रखना जरूरी होता है। प्लेलिस्ट में ऐसे गाने शामिल करें जो सभी आयु वर्ग के लोगों के लिए सुखद हो। गाने हमेशा मधुर और मेलोडियस होने चाहिए। इस तरह के गाने न केवल कानों को अच्छा महसूस कराते हैं, बल्कि वे दिलों को भी जोड़ते हैं। शादी के इस खास दिन पर रोमांटिक गाने, जैसे “तुम ही हो”, “तुम जो आए” आदि, माहौल को और भी खास बना सकते हैं। गानों का चयन इस तरह करें कि वे शालीनता और गरिमा का प्रतीक हों। शादी एक गंभीर और सम्मानजनक अवसर है, और इस पर कोई भी गाना जो शब्दों में शालीनता को न दिखाए, उसे सूची से हटा दिया जाना चाहिए।

हर रस्म के लिए सही संगीत का चयन करें। जयमाला के लिए रोमांटिक और भावुक गाने, डांस फ्लोर के लिए एनर्जेटिक ट्रैक, और विदाई के समय पर भावनात्मक धुनें इस दिन को और भी यादगार बना सकती हैं। शादी में पारंपरिक भारतीय संगीत, सूफी गाने, और लोकगीत भी एक अहम भूमिका निभा सकते हैं। इस तरह के गाने शादी के पारंपरिक और सांस्कृतिक वातावरण को और अधिक जीवंत बना सकते हैं। अगर बजट अनुमति देता है, तो लाइव बैंड या सूफी गायन को शामिल करना एक अच्छा विचार हो सकता है। लाइव संगीत एक अलग प्रकार की आत्मीयता और जुड़ाव उत्पन्न करता है जो डीजे संगीत से नहीं हो सकता।

शादी सिर्फ एक आयोजन नहीं, एक भावनात्मक यात्रा है

शादी केवल एक उत्सव नहीं होती, बल्कि यह एक भावनात्मक यात्रा होती है। संगीत, जो हमारे दिलों और दिमागों को जोड़ता है, इस यात्रा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। सही संगीत चयन न केवल समारोह की गरिमा और खुशी को बढ़ाता है, बल्कि यह उन रिश्तों की भी पुष्टि करता है जो जीवन भर बनाए जाते हैं। इसलिए, जब आप अपनी शादी के संगीत का चयन करें, तो यह सोचें कि गाने केवल मनोरंजन के लिए नहीं हैं, बल्कि वे एक गहरे अर्थ और संदेश का प्रतिनिधित्व करते हैं। गानों के चयन में शालीनता, भावनाओं का सम्मान और सांस्कृतिक परंपराओं का पालन बहुत महत्वपूर्ण है। अंततः, शादी के संगीत का उद्देश्य केवल माहौल को मनोरंजन से भरना नहीं है, बल्कि यह हमें हमारी भावनाओं और रिश्तों से भी जोड़ता है। इसलिए अश्लील और कानफोड़ू गानों से परहेज करें और ऐसे गानों का चयन करें जो इस पवित्र बंधन की गरिमा और खुशियों को और बढ़ाएं।

— डॉ. सत्यवान सौरभ

डॉ. सत्यवान सौरभ

✍ सत्यवान सौरभ, जन्म वर्ष- 1989 सम्प्रति: वेटरनरी इंस्पेक्टर, हरियाणा सरकार ईमेल: [email protected] सम्पर्क: परी वाटिका, कौशल्या भवन , बड़वा (सिवानी) भिवानी, हरियाणा – 127045 मोबाइल :9466526148,01255281381 *अंग्रेजी एवं हिंदी दोनों भाषाओँ में समान्तर लेखन....जन्म वर्ष- 1989 प्रकाशित पुस्तकें: यादें 2005 काव्य संग्रह ( मात्र 16 साल की उम्र में कक्षा 11th में पढ़ते हुए लिखा ), तितली है खामोश दोहा संग्रह प्रकाशनाधीन प्रकाशन- देश-विदेश की एक हज़ार से ज्यादा पत्र-पत्रिकाओं में लगातार प्रकाशन ! प्रसारण: आकाशवाणी हिसार, रोहतक एवं कुरुक्षेत्र से , दूरदर्शन हिसार, चंडीगढ़ एवं जनता टीवी हरियाणा से समय-समय पर संपादन: प्रयास पाक्षिक सम्मान/ अवार्ड: 1 सर्वश्रेष्ठ निबंध लेखन पुरस्कार हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड भिवानी 2004 2 हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड काव्य प्रतियोगिता प्रोत्साहन पुरस्कार 2005 3 अखिल भारतीय प्रजापति सभा पुरस्कार नागौर राजस्थान 2006 4 प्रेरणा पुरस्कार हिसार हरियाणा 2006 5 साहित्य साधक इलाहाबाद उत्तर प्रदेश 2007 6 राष्ट्र भाषा रत्न कप्तानगंज उत्तरप्रदेश 2008 7 अखिल भारतीय साहित्य परिषद पुरस्कार भिवानी हरियाणा 2015 8 आईपीएस मनुमुक्त मानव पुरस्कार 2019 9 इंटरनेशनल जर्नल ऑफ़ रिसर्च एंड रिव्यु में शोध आलेख प्रकाशित, डॉ कुसुम जैन ने सौरभ के लिखे ग्राम्य संस्कृति के आलेखों को बनाया आधार 2020 10 पिछले 20 सालों से सामाजिक कार्यों और जागरूकता से जुडी कई संस्थाओं और संगठनों में अलग-अलग पदों पर सेवा रिसर्च स्कॉलर इन पोलिटिकल साइंस, दिल्ली यूनिवर्सिटी, कवि,स्वतंत्र पत्रकार एवं स्तंभकार, (मो.) 9466526148 (वार्ता) (मो.) 7015375570 (वार्ता+वाट्स एप) 333,Pari Vatika, Kaushalya Bhawan, Barwa, Hisar-Bhiwani (Haryana)-127045 Contact- 9466526148, 01255281381 facebook - https://www.facebook.com/saty.verma333 twitter- https://twitter.com/SatyawanSaurabh

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