सच्चे सद्गुरु जब मिलते हैं, होता सच्चा ज्ञान
सच्चे सद्गुरु जब मिलते हैं, होता सच्चा ज्ञान।
ज्योति जलाते जीवन की गुरु, होता हमको भान।
तम अज्ञान का दूर कर गुरु, देते हैं संस्कार।
दिव्य अलौकिक दृष्टि हमें दें, लुटा रहे हैं प्यार।।
मग प्रशस्त करते जीवन का, बढ़ती जाती शान।
सच्चे सद्गुरु जब मिलते हैं, होता सच्चा ज्ञान।।
कुंभ बने हम शिष्य आपके, आप बने कुम्हार।
यूँ ही गढ़ते इस जीवन को, जाते आज सँवार।।
सच्चाई के पथ पर बढ़ते, छूटे सब अभिमान।
सच्चे सद्गुरु जब मिलते हैं, होता सच्चा ज्ञान।।
ज्ञान सिंधु गुरु बने हुए हैं, करें नहीं वे भेद।
जो जाता गुरु के पास नहीं, व्यक्त करें वे खेद।।
हम देखो हैं सब अज्ञानी, देना हम पर ध्यान।
सच्चे सद्गगुरु जब मिलते हैं, होता सच्चा ज्ञान।।
— रवि रश्मि ‘अनुभूति’
