कोशिश
दिन भर नौकरी की तलाश के बाद थकाहारा, निराश, भानू जब घर लौटा तो मीता ने हमेशा की ही तरह मुस्कुरा कर उसका स्वागत किया और मुस्कुराते हुए ही बोली, “अरे सही समय पर आ गये तुम बिलकुल। मैं बस चाय बनाने ही जा रही थी। आज पकोड़े भी बनाये हैं मैंने चाय के साथ…।’
“पूछोगी नही कि मुझे आज भी नौकरी मिली या नहीं? चाय पकोड़े बनाकर ऐसे स्वागत कर रही हो मेरा कि न जाने मैं कितनी बड़ी ख़ुशख़बरी लेकर आ रहा हूँ!’
“अरे तो ख़ुश रहने का नौकरी मिलने से क्या सम्बन्ध है भला ! तुम कोशिश कर रहे हो न भानू। हाथ पर हाथ रखे तो नही बैठे न। अब तक नौकरी की ही थी तुमने। कभी कोई कमी नहीं होने दी घर में। अब कम्पनी अपनी किन्हीं व्यक्तिगत समस्याओं के चलते बन्द हो गई है तो इससे तुम्हारी क़ाबिलियत और काम करने की चाहत पर तो सवाल नही उठाया जा सकता न। हाँ तुम कोशिश नहीं करते, हाथ पर हाथ रखे बैठे रहते तो मुझे ज़रूर चिन्ता होती …। तब मैं तुम्हें सच्ची में एक गिलास पानी की भी नहीं पूछती। अरे, नौकरी जब मिलेगी तब मिल जायेगी भानू। बस तुम अपनी कोशिश करना कभी मत छोड़ना और न ही कभी मायूस होना …। सुना है न कि कोशिश करने वालों की कभी हार नही होती …।”
“अच्छा बाबा अच्छा। आ गई बात मेरी समझ में। चलो मैं फ़्रेश होकर आता हूँ, तुम चाय पकोड़े लेकर आओ।” पत्नी की बात पर भानू भी मुस्कुराते हुये बोला और फ़्रेश होने चला गया। मीता उसे जाते हुये देखती रही और मन ही मन सोचती रही कि चाहे जो हो जाये, वो अपने भानू की हिम्मत और हौंसला कभी नही टूटने देगी …। इन हालातों में अब यही उसका धर्म भी है और कर्म भी। वो अपनी सहेली अनिता जैसा कभी नहीं करेगी कि जरा पति को कुछ परेशानी आई नहीं कि उसे अकेला छोड़ कर बस चल दीं अपने मम्मी पापा के पास ….। पति पत्नी का रिश्ता दिल की गहराईयों से जुड़ा वो आत्मीयता का रिश्ता होता है जिसे सुख और दुख दोनों में ही समान रहना चाहिए। तभी तो वो फलता फूलता है न। वैसे भी उसे अपने भानू पर पूरा भरोसा है कि जल्दी ही उसकी कोशिश कामयाब होकर रहेगी और उसे पहले से भी बेहतर नौकरी मिल जाएगी। अपनी इसी सोच के साथ उसके अधरों पर मीठी सी मुस्कान आ गई और वो रसोई में घुस गई…।
— रेनू ‘अंशुल’
