प्रेम पुष्प
प्रेम न बोले शोर से, बोले मन की बात।मौन अधर मुस्काइए, जग जाएँ जज़्बात॥ प्रेम नदी की धार है, निर्मल
Read Moreप्रेम न बोले शोर से, बोले मन की बात।मौन अधर मुस्काइए, जग जाएँ जज़्बात॥ प्रेम नदी की धार है, निर्मल
Read Moreसुबह के क़रीबन नौ सवा नौ का ही समय होगा । दिल्ली मेट्रो हर रोज़ की तरह खचाखच भरी हुई
Read Moreवह सुबह की पहली किरण हैजो अंधेरों को सहलाकर जगाती हैवह शाम की थकी हुई लालिमा हैजो दिनभर के सफ़र
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