पर्यावरण

तूफ़ान और बारिश की यह घड़ी

आसमान पर छाए हुए काले बादलों की घनघोर गर्जना और उसके साथ ही ज़मीन की तरफ लपकती हुई कड़कती बिजली, क़ुदरत के जलाल का एक ऐसा रूप पेश करती है जो दिल में खौफ के साथ-साथ एक सनसनी भी पैदा कर देती है। फिज़ा में छाया हुआ गहरा अंधेरा और डरा देने वाली ख़ामोशी यह बता रही है कि तूफ़ान अब बिल्कुल क़रीब आ चुका है। इस हंगामेदार माहौल में, सुनसान सड़क पर बारिश की शुरुआती बूंदें गिरना शुरू हो चुकी हैं, जो ज़मीन को भिगोने के साथ-साथ हर ज़र्रे में एक सिहरन पैदा कर रही हैं।
घर पहुँचने की जल्दी और खौफ़ का अहसास
इस ख़तरनाक मौसम के बीच, रास्ते में मौजूद महिलाओं के कदमों की रफ्तार तेज़ हो चुकी है। उनके चेहरों पर छाया हुआ तनाव और बेचैनी साफ ज़ाहिर करती है कि उन्हें हर हाल में जल्दी से जल्दी अपने घर की सुरक्षित पनाहगाह तक पहुँचना है। बिजली की कड़कती हुई लहरों और आसमान के बिगड़े हुए तेवर को देखकर दिल में एक अनजाना डर बैठ जाता है कि न जाने अगले ही पल क्या होने वाला है।
बच्चों का मासूम अहसास और बारिश का खौफ़
अगर इस भीगे हुए रास्ते पर इस वक्त कोई छोटे बच्चे होते, तो उनके जज़्बात इस तूफ़ान के सामने और भी ज्यादा नाज़ुक होते। बच्चों के लिए कड़कती हुई बिजली की आवाज़ और गहरे काले बादल किसी खौफ़नाक सपने जैसे होते हैं। वे डरकर अपनी माओं के आंचल में छुपने की कोशिश करते, उनके दिल इस डर से ज़ोर-ज़ोर से धड़क रहे होते कि कहीं तूफ़ान उन्हें अपनी चपेट में न ले ले। इन मासूमों की दुनिया उस वक्त सिर्फ़ अपने घर के गर्म बिस्तर और मां की ममता की पनाह ढूंढ रही होती है।
ज़िंदगी की क़शमक़श और क़ुदरती नज़ारा
यह पूरा मंज़र इंसानी जिंदगी की अक्कास(झलक) करता है जहां क़ुदरत के तूफ़ानों के सामने इंसान बेबस नज़र आता है। जैसे ही पहली बारिश की बूंदें ज़मीन पर पड़ती हैं और बादल गरजते हैं, इंसान की तमाम तर दौड़-धूप सिर्फ़ एक ही मक़सद के लिए सिमट जाती है, अपने घर की तरफ़ वापसी। यह तस्वीर और इसकी फिज़ा हमें याद दिलाती है कि कितनी ही मुश्किलें क्यों न हों, असल सुकून और हिफाज़त सिर्फ अपने घर की चारदीवारी के अंदर ही मिलती है।

— डॉ. मुश्ताक़ अहमद शाह सहज़

डॉ. मुश्ताक़ अहमद शाह

पिता का नाम: अशफ़ाक़ अहमद शाह जन्मतिथि: 24 जून जन्मस्थान: ग्राम बलड़ी, तहसील हरसूद, जिला खंडवा, मध्य प्रदेश कर्मभूमि: हरदा, मध्य प्रदेश स्थायी पता: मगरधा, जिला हरदा, पिन 461335 संपर्क: मोबाइल: 9993901625 ईमेल: dr.m.a.shaholo2@gmail.com शैक्षिक योग्यता एवं व्यवसाय शिक्षा,B.N.Y.S.बैचलर ऑफ़ नेचुरोपैथी एंड योगिक साइंस. बी.कॉम, एम.कॉम बी.एड. फार्मासिस्ट आयुर्वेद रत्न, सी.सी.एच. व्यवसाय: फार्मासिस्ट, भाषाई दक्षता एवं रुचियाँ भाषाएँ, हिंदी, उर्दू, अंग्रेज़ी रुचियाँ, गीत, ग़ज़ल एवं सामयिक लेखन अध्ययन एवं ज्ञानार्जन साहित्यिक परिवेश में रहना वालिद (पिता) से प्रेरित होकर ग़ज़ल लेखन पूर्व पद एवं सामाजिक योगदान, पूर्व प्राचार्य, ज्ञानदीप हाई स्कूल, मगरधा पूर्व प्रधान पाठक, उर्दू माध्यमिक शाला, बलड़ी ग्रामीण विकास विस्तार अधिकारी, बलड़ी कम्युनिटी हेल्थ वर्कर, मगरधा साहित्यिक यात्रा लेखन का अनुभव: 30 वर्षों से निरंतर लेखन प्रकाशित रचनाएँ: 2000+ कविताएँ, ग़ज़लें, सामयिक लेख प्रकाशन, निरन्तर, द ग्राम टू डे, दी वूमंस एक्सप्रेस, एजुकेशनल समाचार पत्र (पटना), संस्कार धनी (जबलपुर),जबलपुर दर्पण, सुबह प्रकाश , दैनिक दोपहर,संस्कार न्यूज,नई रोशनी समाचार पत्र,परिवहन विशेष,समाचार पत्र, घटती घटना समाचार पत्र,कोल फील्ड मिरर (पश्चिम बंगाल), अनोख तीर (हरदा), दक्सिन समाचार पत्र, नगसर संवाद, नगर कथा साप्ताहिक (इटारसी) दैनिक भास्कर, नवदुनिया, चौथा संसार, दैनिक जागरण, मंथन (बुरहानपुर), कोरकू देशम (टिमरनी) में स्थायी कॉलम अन्य कई पत्र-पत्रिकाओं में निरंतर रचनाएँ प्रकाशित प्रकाशित पुस्तकें एवं साझा संग्रह साझा संग्रह (प्रमुख), मधुमालती, कोविड, काव्य ज्योति, जहाँ न पहुँचे रवि, दोहा ज्योति, गुलसितां, 21वीं सदी के 11 कवि, काव्य दर्पण, जहाँ न पहुँचे कवि (रवीना प्रकाशन) उर्विल, स्वर्णाभ, अमल तास, गुलमोहर, मेरी क़लम से, मेरी अनुभूति, मेरी अभिव्यक्ति, बेटियां, कोहिनूर, कविता बोलती है, हिंदी हैं हम, क़लम का कमाल, शब्द मेरे, तिरंगा ऊंचा रहे हमारा (मधुशाला प्रकाशन) अल्फ़ाज़ शब्दों का पिटारा, तहरीरें कुछ सुलझी कुछ न अनसुलझी (जील इन फिक्स पब्लिकेशन) व्यक्तिगत ग़ज़ल संग्रह: तुम भुलाये क्यों नहीं जाते तेरी नाराज़गी और मेरी ग़ज़लें तेरा इंतज़ार आज भी है (नवीनतम) पाँच नए ग़ज़ल संग्रह प्रकाशनाधीन सम्मान एवं पुरस्कार साहित्यिक योगदान के लिए अनेक सम्मान एवं पुरस्कार प्राप्त पाठकों का स्नेह, साहित्यिक मंचों से मान्यता मुश्ताक़ अहमद शाह जी का साहित्यिक और सामाजिक योगदान न केवल मध्य प्रदेश, बल्कि पूरे हिंदी-उर्दू साहित्य जगत के लिए गर्व का विषय है। आपकी लेखनी ने समाज को संवेदनशीलता, प्रेम और मानवीय मूल्यों से जोड़ा है। आपके द्वारा रचित ग़ज़लें और कविताएँ आज भी पाठकों के मन को छूती हैं और साहित्य को नई दिशा देती हैं।

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