हिंदीमय भारत कर दो
राजनीति ने फिर हिंदी की, चुन्नी आज उछाली है।
लाज छोड़़कर एक हो गया, ग्राहक एवं माली है।
उठो कलम के प्रखर साधकों, हिंदीमय भारत कर दो-
वरना, डेढ़ अरब बेटों की, माता को यह गाली है।।
— डॉ. अवधेश कुमार अवध
राजनीति ने फिर हिंदी की, चुन्नी आज उछाली है।
लाज छोड़़कर एक हो गया, ग्राहक एवं माली है।
उठो कलम के प्रखर साधकों, हिंदीमय भारत कर दो-
वरना, डेढ़ अरब बेटों की, माता को यह गाली है।।
— डॉ. अवधेश कुमार अवध