कछुआ और खरगोश
कछुआ और खरगोशएक मंद, एक तेजप्रतियोगिता में स्वयं ही नहीं उतरे थेइन्हें उतारा गया थाकतिपय तत्कालीन छलियों द्वारा। खरगोश यूं
Read Moreकछुआ और खरगोशएक मंद, एक तेजप्रतियोगिता में स्वयं ही नहीं उतरे थेइन्हें उतारा गया थाकतिपय तत्कालीन छलियों द्वारा। खरगोश यूं
Read Moreयशपाल नेदेख लिया थावर्षों पहलेबड़े घरों केफटे परदों केपीछे की कंगाली। मूलभूत आवश्यकता पूर्ति हेतुजद्दोजहद करते मर्दों कोअरमानों का गला
Read Moreहिंदी साहित्य को लेकर एक ज्वलंत सवाल आजकल उठ रहा है। उठना स्वाभाविक भी है। उठना चाहिए भी। विश्व की
Read Moreकैक्टस एवं मनीप्लांट कोघर के भीतर बालकनी मेंससम्मान सुसज्जित जगह मिलीगमले इतरायेपानी के फव्वारों सेघर के सदस्यगणअपने से पहले नहलाये।
Read Moreतुम भी भागो, मैं भी भागूं, भागो,भागम – भाग लगी।सबको ही अधिकार चाहिए, ड्यूटी लगती नहीं सगी।। पहले लूटो अपने
Read Moreहे रूपसि! तुझको देख-देख, उपमान हमारे लज्जित हैं। तेरी आंखों में है जादू, दिल डूब – डूब है बेकाबूनवरस प्रतिबिंबित
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