Author: *डॉ. अवधेश कुमार अवध

कविता

अलग-अलग दुनिया

यशपाल नेदेख लिया थावर्षों पहलेबड़े घरों केफटे परदों केपीछे की कंगाली। मूलभूत आवश्यकता पूर्ति हेतुजद्दोजहद करते मर्दों कोअरमानों का गला

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भाषा-साहित्य

रेवड़ी पुरस्कार परिपाटी और हिंदी साहित्य का आकलन

हिंदी साहित्य को लेकर एक ज्वलंत सवाल आजकल उठ रहा है। उठना स्वाभाविक भी है। उठना चाहिए भी। विश्व की

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