गीतिका/ग़ज़ल डॉ. अरुण कुमार निषाद 15/05/201518/05/2015 ग़ज़ल वो ख्वाब में आये आकर चले गये। मेरे दोस्त मुझसे हाथ छुड़ाकर चले गये।। रहता था मैं अकेले अकेला ही Read More
गीतिका/ग़ज़ल डॉ. अरुण कुमार निषाद 12/05/201512/05/2015 ग़ज़ल : मेरी बरबादियों का जश्न मनाने वाले मेरी बरबादियों का जश्न मनाने वाले सुकूं न पायेगा तू मुझको सताने वाले अश्क-ए-ग़म पी कर जी लूंगा मैं हमदम Read More