ग़ज़ल
दोस्त ही दुश्मन निकला,मैं अंजान रहा आया वो फरेबी खुदा हो गया,मैं इंसान रहा आया! कलयुगी तहजीबी बयारों से होकर
Read Moreकुछ इस तरह से लाकडाउन का मजा लीजिए रुठी है यदि महबूबा तो चुपचाप मना लीजिए! घास मिलती है गले,
Read Moreवक्त बड़ा नाजुक है यार,सम्हल जाइये, बेदाग दामन को बचाके,निकल जाइये! कदम-कदम पर ठगी मिलेंगे दुनिया में उनकी मोहक अदा
Read Moreचारो ओर सन्नाटा पसरा,सूने हुए बाजार,श्री राधे काम काज बंद हुए,घर अंदर है परिवार,श्री राधे | वाहनों के पहिये थमें,यातायात
Read Moreख्यालों में पल – पल तुझे सोचता हूँ मैं ख्वाबों में भी अब तुझे ही देखता हूँ मैं। सुकूँ मिलता
Read Moreइन दिनों शायर प्यारेलाल बड़े उदास से रहते हैं।मायूसी से भरे दिन एवं खोयी-खोयी रातें जैसे-तैसे कट रहीं हैं।लगातार आ
Read Moreघर का चिराग जब घर को जलाये क्या उस पर गर्व करूँ घर का भेदी ही जब लंका ढ़हाए क्या
Read Moreसब कुछ तुमको सौंप दिया मिला ना तुम से अपनापन। नेह का नीड़ उड़ा ले गयी स्वारथ की जो बही
Read Moreआपका तो मुझे नहीं पता …! लेकिन हमें हमारे शिक्षकों ने बचपन में पढ़ाया था कि “रामचंद्र कह गये सिया
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