विडम्बना
समाज की सारी अच्छाइयाँ धीरे धीरे समाप्त होने लगती हैं जब इंसान का नैतिक पतन हो जाता है । नैतिक
Read More“फिर बारिश होने लगी मम्मी, तुम भींग जायेगी। चलो, कुछ देर सामने के मकान के बरामदे में रुक जाते हैं।”
Read Moreरामनवमी के अवसर पर बिंदुधाम मंदिर में भक्तों और दर्शकों की काफी भीड़ थी।बिहार, बंगाल और अन्य राज्यों से हजारों
Read More“बहुत ठंड है। अभी तुम्हारे लिए गरम चादर तैयार करती हूंँ।” चाची ने कमरे के अंदर झाँककर देखा, सात साल
Read More“ज्योति,अब तुम शिक्षिका बन गई हो। उम्र भी तेईस हो गई है अब तो तुम्हें आपत्ति नहीं है न ?” अपने
Read Moreमुहल्ले में रोज कुछ न कुछ मुद्दों पर तर्क बहस और झगड़ा साधारण सी बात है। आज दस वर्षीय गोलू को
Read Moreरुको मत बढ़े चलो मंजिल अभी आई नहीं हिम्मत तेरी टूटे नहीं चलना ही जिंदगी है।1। घटा है घनघोर छाई
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