कविता निशा 'अविरल' 02/03/202527/02/2025 बंद हूं मैं बंद हूं मैं, कैद हूं मैंघूट रही हूं मैं, घट रही हूं मैंपराधीन हूं, ना स्वाधीन मैंबेमोल सी हूं अर्थहीन Read More
कविता निशा 'अविरल' 02/12/202402/12/2024 कविता रात के आगोश मेंसिर्फ खामोशी नहीं लेटती है।उदासी भी लेती है अंगड़ाइयांजैसी काली परछाइयांअवसाद अपना बिस्तर जमा लेता है।मन के Read More
कविता निशा 'अविरल' 01/09/202401/09/2024 कविता दरवाजे पर कौन है?मैं हूँ अपरिचित !आपका यहाँ क्या काम?अच्छा! मैं आगंतुक!आइये,स्वागत है|भीतर आ जाइयेआचमन कीजियेबैठिये,जलपान कीजियेकहिये!प्रयोजन बताइयेप्रयोजन? प्रयोजन,याचना है, Read More