बारिश और बिछोह
ये झड़ी नहीं है सावन की ,,, बस प्रीत विरह की कड़ियाँ है । ये पिया दरश को तरस रही
Read Moreये झड़ी नहीं है सावन की ,,, बस प्रीत विरह की कड़ियाँ है । ये पिया दरश को तरस रही
Read Moreबीते समय की सुख कड़ियाँ चलचित्र सी चित मे चलती है अब दृगजल बन वह मधु स्मृति अनायास नयन से
Read Moreभोर की पहली किरण है , और तुम हो प्रेम से भीगे ये क्षण हैं , और तुम हो ।।
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