ग़ज़ल
एक नगर में आबो दाना कब होता है बंजारों का ठौर ठिकाना कब होता है जाते हैं सब लोग गुलों
Read Moreज्यादा तर मतलब का है व्यवहार आज की दुनिया में है तो लेकिन कम है सच्चा प्यार आज की दुनिया
Read Moreहौसला है मंजिलों का रास्ता मालूम है इसलिये तो ज़िन्दगी का फलसफ़ा मालूम है और कुछ मालूम चाहे हो नही
Read Moreपूछ मत मेरे सफ़र का तज’रबा कैसा रहा पाँव में छाले लिये अँगार पर चलता रहा ख़ूब कस मुझको कसौटी
Read Moreशूल छाले और अनगिन ठोकरों के बाद भी मंजिलों पर हैं निगाहें मुश्किलों के बाद भी है करम मुझ पर
Read Moreरही उम्मीद जिस दर से वहीं रुसवा हुआ हुआ जो भी हमेशा सोच से उलटा हुआ बताऊँगा अगर तो रो
Read Moreचाहते हैं आप ऊँचा पद अगर सीख लीजे चापलूसी का हुनर दूर कितनी चल सकोगे सोच लो मुश्किलों से है
Read Moreरोम रोम में राम बसे हैं, धड़कन-धड़कन गीत। हमको तो ये सारी दुनिया, लगती है मनमीत।। ज़िन्दगी प्रीत प्रीत बस
Read Moreहाथ मिले मन में अनबन है सच मानो भाई भाई का दुश्मन है सच मानो अपनो से तो ग़ैर भले
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